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महाकाल शनि मृत्युंजय स्तोत्र

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महाकाल शनि मृत्युंजय स्तोत्र 〰〰⚛⚛〰⚛⚛⚛〰⚛⚛〰〰 विनियोगः- 〰〰〰〰 ॐ अस्य श्री महाकाल शनि मृत्युञ्जय स्तोत्र मन्त्रस्य पिप्लाद ऋषिरनुष्टुप्छन्दो महाकाल शनिर्देवता शं बीजं मायसी शक्तिः काल पुरुषायेति कीलकं मम अकाल अपमृत्यु निवारणार्थे पाठे विनियोगः। श्री गणेशाय नमः। ॐ महाकाल शनि मृत्युंजयाय नमः। नीलाद्रीशोभाञ्चितदिव्यमूर्तिः खड्गो त्रिदण्डी शरचापहस्तः। शम्भुर्महाकालशनिः पुरारिर्जयत्यशेषासुरनाशकारी ।।1।। मेरुपृष्ठे समासीनं सामरस्ये स्थितं शिवम्‌ । प्रणम्य शिरसा गौरी पृच्छतिस्म जगद्धितम्‌ ।।2।। ॥पार्वत्युवाच॥ भगवन्‌ ! देवदेवेश ! भक्तानुग्रहकारक ! । अल्पमृत्युविनाशाय यत्त्वया पूर्व सूचितम्‌ ।।3।। तदेवत्वं महाबाहो ! लोकानां हितकारकम्‌ । तव मूर्ति प्रभेदस्य महाकालस्य साम्प्रतम्‌ ।।4।। शनेर्मृत्युञ्जयस्तोत्रं ब्रूहि मे नेत्रजन्मनः । अकाल मृत्युहरणमपमृत्यु निवारणम्‌ ।।5।। शनिमन्त्रप्रभेदा ये तैर्युक्तं यत्स्तवं शुभम्‌ । प्रतिनाम चथुर्यन्तं नमोन्तं मनुनायुतम्‌ ।।6।। ॥श्रीशंकर उवाच॥ नित्ये प्रियतमे गौरि सर्वलोक-हितेरते । गुह्याद्गुह्यतमं दिव्यं सर्वलोकोपकारकम्‌ ।।7।। शनिमृत्युञ्जयस

दसों दिशाओं से रक्षा करते हैं श्री भैरव!!

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दसों दिशाओं से रक्षा करते हैं श्री भैरव!! 〰〰〰〰〰〰⚛⚛⚛⚛⚛〰〰〰〰〰〰 भैरव को शिवजी का अंश अवतार माना गया है। रूद्राष्टाध्याय तथा भैरव तंत्र से इस तथ्य की पुष्टि होती है। भैरव जी का रंग श्याम है। उनकी चार भुजाएं हैं, जिनमें वे त्रिशूल, खड़ग, खप्पर तथा नरमुंड धारण किए हुए हैं। उनका वाहन श्वान यानी कुत्ता है। भैरव श्मशानवासी हैं। ये भूत-प्रेत, योगिनियों के स्वामी हैं। भक्तों पर कृपावान और दुष्टों का संहार करने में सदैव तत्पर रहते हैं। भगवान भैरव अपने भक्तों के कष्टों को दूर कर बल, बुद्धि, तेज, यश, धन तथा मुक्ति प्रदान करते हैं। जो व्यक्ति भैरव जयंती को अथवा किसी भी मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भैरव का व्रत रखता है, पूजन या उनकी उपासना करता है वह समस्त कष्टों से मुक्त हो जाता है। श्री भैरव अपने उपासक की दसों दिशाओं से रक्षा करते हैं। भैरव का मूल मंत्र 〰〰⚛⚛⚛〰〰 रविवार एवं बुधवार को भैरव की उपासना का दिन माना गया है। कुत्ते को इस दिन मिष्ठान खिलाकर दूध पिलाना चाहिए। भैरव की पूजा में श्री बटुक भैरव अष्टोत्तर शत-नामावली का पाठ करना चाहिए। भैरव की प्रसन्नता के लिए श्री बटुक भैरव मूल मंत्र