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Showing posts from October, 2017

राम स्तुति - यह राम स्तुति सुनकर प्रसन्न होंगे बजरंगबली

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यह राम स्तुति सुनकर प्रसन्न होंगे बजरंगबली श्री राम के नाम का जप करने से उनके परम भक्त हनुमान जी आसानी से खुश हो जाते हैं. इसलिए बजरंगबली की पूजा करने से पहले रघुनंदन राम की यह स्तुति गाएं और उनकी कृपा-दृष्टि‍ पाएं - श्री राम  चंद्र कृपालु भजमन हरण भाव भय दारुणम् । नवकंज लोचन, कंज मुख, कर कंज, पद कन्जारुणम ॥1॥ कंदर्प अगणित अमित छवी नव नील नीरज सुन्दरम । पट पीत मानहु तड़ित रुचि शुचि नौमी जनक सुतावरम् ॥2॥ भजु दीनबंधु दिनेश दानव दैत्य वंश निकंदनम् । रघुनंद आनंदकंद कौशलचंद दशरथ नन्दनम ॥3॥ सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारू उदारु अंग विभुषणं । आजानु भुज शर चाप धर संग्राम जित खर-धुषणं ॥4॥ इति वदति तुलसीदास शंकर-शेष-मुनि-मन-रंजनम् । मम् हृदय कुंज निवास कुरु कामादी खल दल गंजनम् ॥5॥ मनु जाहिं राचेऊ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर सांवरों । करुना निधान सुजान सिलु सनेहु जानत रावरो ॥6॥ एही भांती गौरी असीस सुनि सिय सहित हिय हरषी अली । तुलसी भवानी पूजि पूनि पूनि मुदित मन मंदिर चली ॥7॥ दोहा-  जानि गौरी अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि । मंजुल मंगल मूल बाम अंग फरकन लगे ॥ # आर्यवर्त

काशी विश्वनाथ स्तुति - वेदसार शिवस्तव

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ऊँ नम: शिवाय  ।। जय श्री काशी विश्वनाथ ।। हर हर महादेव ।। वेदसार शिवस्तव: - आदिगुरू श्री शंकराचार्य द्वारा रचित यह शिवस्तव वेद वर्णित शिव की स्तुति प्रस्तुत करता है। शिव के रचयिता, पालनकर्ता एव विलयकर्ता विश्वरूप का वर्णन करता यह स्तुति संकलन करने योग्य है। पशूनां पतिं पापनाशं परेशं गजेन्द्रस्य कृत्तिं वसानं वरेण्यम् जटाजूटमध्ये स्फुरद्गाङ्गवारिं महादेवमेकं स्मरामि स्मरारिम् (हे शिव आप) जो प्राणिमात्र के स्वामी एवं रक्षक हैं, पाप का नाश करने वाले परमेश्वर हैं, गजराज का चर्म धारण करने वाले हैं, श्रेष्ठ एवं वरण करने योग्य हैं, जिनकी जटाजूट में गंगा जी खेलती हैं, उन एक मात्र महादेव को बारम्बार स्मरण करता हूँ| महेशं सुरेशं सुरारातिनाशं विभुं विश्वनाथं विभूत्यङ्गभूषम् विरूपाक्षमिन्द्वर्कवह्नित्रिनेत्रं सदानन्दमीडे प्रभुं पञ्चवक्त्रम् हे महेश्वर, सुरेश्वर, देवों के देव, दु:खों का नाश करने वाले विभुं विश्वनाथ (आप) विभुति धारण करने वाले हैं, सूर्य, चन्द्र एवं अग्नि आपके तीन नेत्र के सामान हैं। ऎसे सदा आनन्द प्रदान करने वाले पञ्चमुख वाले महादेव मैं आपकी स्तुति करता हूँ। गिरीशं गण

“गुरु और सदगुरु में क्या फर्क है?”

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“गुरु और सदगुरु में क्या फर्क है?” गुरु का अर्थ होता है, जो एक प्रकार की बुद्धि के लिए सूत्र दे जाए। उसकी सीमा है। वह एक तरह की बात कह जाता है, उतनी बात जिनकी समझ में पड़ती है उतने थोड़े से लोग उसके पीछे चल पड़ते हैं। सदगुरु कभी-कभी होता है। सदगुरु का अर्थ होता है, जो मनुष्य मात्र के लिए बात कह जाए। जो किसी को छोड़े ही नही। जिसकी बांहें इतनी बड़ी हों कि सभी समा जाएं–स्त्री और पुरुष, सक्रिय और निषिक्रय, कर्मठ और निषिक्रय, बुद्धिमान और भाविक, तर्कयुक्त और प्रेम से भरे, सब समा जाएं, जिसकी बांहों में सब आ जाएं; जिसकी बांहों में किसी के लिए इनकार ही न हो। बुद्ध ने वर्षो तक स्त्रियों को दीक्षा नही दी। इनकार करते रहे। वह मार्ग पुरुषों के लिए था। उसमें स्त्रियों की जगह नही है। स्त्रियों का थोड़ा भय भी है। और जब मजबूरी में, बहुत आग्रह करने पर बुद्ध ने दीक्षा भी दी स्त्रियों को, तो यह कहकर दी कि मेरा धर्म पाँच हजार साल चलता, अब केवल पाँच सौ साल चलेगा, क्योंकि स्त्रियों की मौजूदगी मेरे धर्म को भ्रष्ट कर देगी। बुद्ध के सूत्र मौलिक रूप से पुरुष के लिए काम के हैं, क्योंकि प्रेम की वहाँ कोई जगह नह

जानिए, क्या है भक्ति का वास्तविक अर्थ

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जानिए, क्या है भक्ति का वास्तविक अर्थ ईश्वरे परमं प्रेम, भक्तिरित्यभिधीयते। आसक्तिविषय प्रेम देहदारगृहादिषु।। 6।। ईश्वर के प्रति जो परम प्रेम है उसे ही भक्ति कहते हैं। अपनी देह अथवा पत्नी अथवा घर या अन्य विषयों के प्रति जो प्रेम है उसे आसक्ति कहते हैं।अब हम यह देखेंगे कि क्या भक्ति एक क्रिया है अथवा भक्ति क्या कोरी भावुकता है या फिर भक्ति के लक्षण क्या हैं। ‘नारद भक्ति-सूत्र’ में कहा गया है कि ‘परमात्मा’ के प्रति परम प्रेम को भक्ति कहते हैं। परम प्रेम किसे कहते हैं-यह हम आगे देखेंगे। यहां कहा गया है कि ईश्वर के प्रति परम प्रेम भक्ति है तो फिर लौकिक विषयों के प्रति जो हमारा प्रेम है वह क्या है? उत्तर दिया गया है कि वह प्रेम आसक्ति है। शब्द-स्पर्श-रूप-रस-गंध विषयों के प्रति जो प्रेम है या अपने शरीर से, पत्नी से, गाड़ी अथवा अन्य भोग्य वस्तुओं से जो हमारी प्रीति है उसे आसक्ति कहते हैं। इन दोनों में जो भेद है उसे समझने की चेष्टा करें। भक्ति नि:संदेह प्रेमरूपा है। किंतु हर प्रकार का और हर किसी से किया गया प्रेम भक्ति नहीं है। हमारे घर में बहुत-सी वस्तुएं और प्राणी हैं। पर हम यह तो नहीं क

अय्यासी मुहम्मद का सच....

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अय्यासी मुहम्मद का सच विश्व में भारतीय संस्कृति और परम्परा को महान माना जाता है .क्योंकि इस में स्त्रियों को देवी की तरह सम्मान दिया जाता है .यहाँ तक मौसी , बुआ चचेरी बहिन और पुत्र वधु पर सपने में भी बुरी दृष्टि रखने को महापाप और अपराध माना गया है . लेकिन इन्हीं कारणों से कोई भी समझदार व्यक्ति इसलाम को धर्म कभी नहीं मानेगा , क्योंकि मुहम्मद साहब अपनी वासना पूर्ति के लिए कुरान का सहारा लेकर ऎसी ही स्त्रियों से सहवास करने को वैध बना देते थे , जिसका पालन मुसलमान आज भी कर रहे हैं .इस विषय को स्पष्ट करने के लिये कुरान की उन आयतों , हदीसों और उनकी ऐतिहासिक प्रष्ट भूमि को देखना होगा , कि मुहम्मद साहब ने अपनी सगी मौसी , चचेरी बहिन और अपने दत्तक पुत्र की पत्नी से सहवास कैसे किया था . और इस पाप को कुरान की आयत बना कर कैसे जायज बना दिया . इस्लामी परिभाषा में अपने शहर को छोड़ कर पलायन करने को हिजरत (Migration ) कहा जाता है . लगभग सन 622 में मुहम्मद साहब को मक्का छोड़ कर मदीना जाना पडा था .उनके साथ कुछ पुरुष और महिलायें भी थी . साथ में उनकी प्रिय पत्नी आयशा भी थी . इसी घटना की प्रष्ट भूमि में कुरआ