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बजरंग बाण

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बजरंगबाण दोहा निश्चय प्रेम प्रतीत ते, विनय करें सनमान । तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्घ करैं हनुमान ।। चौपाई जय हनुमन्त सन्त हितकारी । सुन लीजै प्रभु अरज हमारी ।। जन के काज विलम...

🚩📯।।क्षी गणेश स्त्रोतं।।📯🚩

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🚩📯।।क्षी गणेश स्त्रोतं।।📯🚩 प्रणम्य शिरसा देवं गौरी विनायकम् । भक्तावासं स्मेर नित्यमाय्ः कामार्थसिद्धये ॥1॥🚩 प्रथमं वक्रतुडं च एकदंत द्वितीयकम् । तृतियं कृष्णप...

महाकाल स्तोत्र

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महाकाल स्तोत्रं  इस स्तोत्र को भगवान् महाकाल ने खुद भैरवी को बताया था. इसकी महिमा का जितना वर्णन किया जाये कम है. इसमें भगवान् महाकाल के विभिन्न नामों का वर्णन करते हुए उनकी स्तुति की गयी है . शिव भक्तों के लिए यह स्तोत्र वरदान स्वरुप है . नित्य एक बार जप भी साधक के अन्दर शक्ति तत्त्व और वीर तत्त्व जाग्रत कर देता है . मन में प्रफुल्लता आ जाती है . भगवान् शिव की साधना में यदि इसका एक  बार जप कर लिया जाये तो सफलता की सम्भावना बड जाती है .  ॐ महाकाल महाकाय महाकाल जगत्पते  महाकाल महायोगिन महाकाल नमोस्तुते  महाकाल महादेव महाकाल महा प्रभो  महाकाल महारुद्र महाकाल नमोस्तुते महाकाल महाज्ञान महाकाल तमोपहन महाकाल महाकाल महाकाल नमोस्तुते  भवाय च नमस्तुभ्यं शर्वाय च नमो नमः  रुद्राय च नमस्तुभ्यं पशुना पतये नमः  उग्राय च नमस्तुभ्यं महादेवाय वै  नमः  भीमाय च नमस्तुभ्यं मिशानाया नमो नमः  ईश्वराय नमस्तुभ्यं तत्पुरुषाय वै नमः  सघोजात नमस्तुभ्यं शुक्ल वर्ण नमो नमः  अधः काल अग्नि रुद्राय रूद्र रूप आय वै नमः  स्थितुपति...

शिव से जुड़ी 12 गुप्त बातें, जानिए...

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🕉 शिव से जुड़ी 12 गुप्त बातें, जानिए... 'शिव का द्रोही मुझे स्वप्न में भी पसंद नहीं।'- भगवान रामइंस्टीन से पूर्व शिव ने ही कहा था कि 'कल्पना' ज्ञान से ज्यादा महत्वपूर्ण है। हम जैसी कल्पना और विचार करते हैं, वैसे ही हो जाते हैं। शिव ने इस आधार पर ध्यान की कई विधियों का विकास किया। भगवान शिव दुनिया के सभी धर्मों का मूल हैं। शिव के दर्शन और जीवन की कहानी दुनिया के हर धर्म और उनके ग्रंथों में अलग-अलग रूपों में विद्यमान है। आज से 15 से 20 हजार वर्ष पूर्व वराह काल की शुरुआत में जब देवी-देवताओं ने धरती पर कदम रखे थे, तब उस काल में धरती हिमयुग की चपेट में थी। इस दौरान भगवान शंकर ने धरती के केंद्र कैलाश को अपना निवास स्थान बनाया। विष्णु ने समुद्र को और ब्रह्मा ने नदी के किनारे को अपना स्थान बनाया था। पुराण कहते हैं कि जहां पर शिव विराजमान हैं उस पर्वत के ठीक नीचे पाताल लोक है, जो भगवान विष्णु का स्थान है। शिव के आसन के ऊपर वायुमंडल के पार क्रमश: स्वर्ग लोक और फिर ब्रह्माजी का स्थान है, जबकि धरती पर कुछ भी नहीं था। इन तीनों से सब कुछ हो गया। वैज्ञानिकों के अनुसार तिब्बत धरत...

--।।श्रेष्ठ साधिका तो धूमावती की ही आकाञ्छा करती हैं।।-- ।।अग्निकारिष्टकम्-6।।

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--।।श्रेष्ठ साधिका तो धूमावती की ही आकाञ्छा करती हैं।।--                          ।।अग्निकारिष्टकम्-6।। आर्यावर्तीय संस्कृति "जैन-मत" के एक महान "आचार्य हरिभद्र"द्वारा प्र...

हाँ सखियों!!दुनिया के सिरे का अंत अपने घर में ही होता है"।। ।।अग्निकारिष्टकम्-8।।

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।। हाँ सखियों!!दुनिया के सिरे का अंत अपने घर में ही होता है"।।                            ।।अग्निकारिष्टकम्-8।। "जैन-मत" के एक महान "आचार्य हरिभद्र"द्वारा प्रकाशित"अग्निकारि...

जौहर - क्यों हुआ आवश्यक?

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जौहर - क्यों हुआ आवश्यक? देश में आज भी बहुत सी जनता ऐसी है जो कि प्रश्न उठाती है कि जौहर जैसी प्रथा आखिर थी ही क्यूँ? ये वो लोग हैं जो 'हिन्दू-मुस्लिम भाई भाई' में विशवास रखते हैं, ये वो लोग हैं जिन्होंने काश्मीरी पंडितों की आपबीती को सुनने-पढने की जहमत नहीं उठाई! और न प-बंगाल की हिन्दू बहनों पर हो रहे अत्याचारों को जानने का प्रयत्न किया, न यह जाना की निर्भय के बलात्कारी कौन थे, न ये पहचाना की बुलन्दशहर के बलात्कारी कौन थे? अगर जानते तो प्रश्न न करते। जानते तो आज भी जौहर की प्रथा को सर नवाने के लिए तैयार होते। हर मुसलमान आक्रमणकारी था एक बलात्कारी नरपिशाच सनातन संस्कृति में सभ्य नियम थे, युद्ध तब भी होते थे किंतु नारियों की अस्मिता पर कोई आंच नहीं आती थी| किले तोड़े जाते थे, राजकोष भी लुटे जाते थे, किंतु माँ-बहनें सबकी माँ-बहनें थीं| उनकी और बुरी दृष्टि से देखना एक  जघन्य पाप ही माना गया| इस कारण जब पहली बार यवनों या तुर्कों ने आक्रमण किया तो भारतीय समझ नहीं पाए की एक युद्ध हार जाने का अर्थ न केवल राज्य गंवा देना होगा, बल्कि अपनी स्त्रियों की, छोटी छोटी कन्यायों की इज्जत गंवा...