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विनोद खन्ना

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शत शत नमन ओम शांति ओम हिंदी सिनेमा के बेहद पॉपुलर अभिनेता विनोद खन्ना अब हमारे बीच नहीं रहे हैं सियासत के पिच पर भी वे बेहद सक्रिय रहे. चार बार सांसद और केंद्र में वे मंत्री भ...

तुलशी एक अमोध वरदान

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तुलसी जी की महिमा... पद्मपुराण के अनुसार नरा नार्यश्वच तां दृष्ट्वा तुलनां दातुमक्षमा:। तेन नाम्ना च तुलसीं तां वदन्ति पुराविद:॥ ‘स्त्री-पुरुष जिस पौधे को देखकर उसकी तुलना करने में समर्थ नहीं हैं, उसका नाम तुलसी है, ऐसा पुरातत्त्ववेता लोग कहते हैं।’ पुष्पों में अथवा देवियों में किसी से भी इनकी तुलना नहीं हो सकी इसलिए उन सबमें पवित्ररूपा इनको तुलसी कहा गया, इनका महत्व वेदों में वर्णित है। तुलसीजी, लक्ष्मीजी (श्रीदेवी) के समान भगवान नारायण की प्रिया और नित्य सहचरी हैं; इसलिए परम पवित्र और सम्पूर्ण जगत के लिए पूजनीया हैं। अत: वे विष्णुप्रिया, विष्णुवल्लभा, विष्णुकान्ता तथा केशवप्रिया आदि नामों से जानी जाती हैं। भगवान श्रीहरि की भक्ति और मुक्ति प्रदान करना इनका स्वभाव है। तुलस्यमृतजन्मासि सदा त्वं केशवप्रिये। केशवार्थं चिनोमि त्वां वरदा भव शोभने॥ त्वदंगसम्भवैर्नित्यं पूजयामि यथा हरिम्। तथा कुरु पवित्रांगि कलौ मलविनाशिनी॥ (पद्मपुराण सृ. ६३।११-१३) अर्थ:- ’तुलसी ! तुम अमृत से उत्पन्न हो और केशव को सदा ही प्रिय हो। कल्याणी ! मैं भगवान की पूजा के लिए तुम्हारे पत्तों को चुनती हूं,...

गौमाता एक अमृतमयी वरदान

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गौमाता एक अमृतमयी वरदान गाय का दूध सर्वोत्‍तम आहार है इसे अमृत के सामान माना जाता है जो आपकी सेहत के लिए बेस्ट माना जाता हैं. गाय के दूध में कैल्शियम, प्रोटीन, आयोडीन, पोटैशि...

नक्सलवाद एक नाशूर

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नक्सल वाद या नाशूर नक्सलवाद को जड़ से ख़त्म करने के लिए  जंगलों की ख़ाक छानने को भेजी गयी सुरक्षा बलों की टुकड़ियों से नक्सली कैंप पर सीधा हमला करना दूरगामी समाधान नहीं होगा।  इससे सुरक्षा बालों को नुक्सान ज्यादा होने की संभावना है। मेरे आंकलन के अनुसार ऐसा सीधा काम करने से सरकार को बचना चाहिए।  ये कोई POK जैसा जगह नहीं है कि पूरा दुश्मन इलाका है, जो भी दिखे मार दो।  उदाहरण के लिए बस्तर डिवीज़न के सुकमा, कांकेर, दंतेवाड़ा,  नारायणपुर और बस्तर या फिर गढ़चिरौली, गोंदिया या करीमनगर में 12 - 14 वर्ष के बच्चे जो स्कूल . यूनिफार्म पहन के जा रहे होते हैं वो साधारण बच्चे भी हो सकते हैं या trained नक्सली। . बस्तर प्रभाग पर आते हैं - इधर के गाँवों में जाने पर दिखेगा की वहां सिर्फ बूढ़े आदमी, बूढी औरतें कुछ अन्य महिलाएँ और बच्चे ही हैं।  लगभग सारे बड़े बच्चे और जवान लड़के - लड़कियां गायब रहते हैं।  वो कहाँ हैं ? दंडकारण्य में घुसकर अंदर एक पूरे जनमानस पर हमला करना कहाँ तक सही रहेगा ये सरकार को तय करना है  ... या फिर हमारे राष्ट्रवादी मित्रों को भी सोचना है  ......

जय संकटमोचन हनुमान चलिशा अर्थसभर

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हम सब हनुमान चालीसा पढते हैं, सब रटा रटाया। क्या हमे चालीसा पढते समय पता भी होता है कि हम हनुमानजी से क्या कह रहे हैं या क्या मांग रहे हैं? बस रटा रटाया बोलते जाते हैं। आनंद और फल शायद तभी मिलेगा जब हमें इसका मतलब भी पता हो। तो लीजिए पेश है श्री हनुमान चालीसा अर्थ सहित!!         ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुरु सुधारि। बरनऊँ रघुवर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि। 📯《अर्थ》→ गुरु महाराज के चरण.कमलों की धूलि से अपने मन रुपी दर्पण को पवित्र करके श्री रघुवीर के निर्मल यश का वर्णन करता हूँ, जो चारों फल धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को देने वाला हे।★ ••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरो पवन कुमार। बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेश विकार।★ 📯《अर्थ》→ हे पवन कुमार! मैं आपको सुमिरन.करता हूँ। आप तो जानते ही हैं, कि मेरा शरीर और बुद्धि निर्बल है। मुझे शारीरिक बल, सदबुद्धि एवं ज्ञान दीजिए और मेरे दुःखों व दोषों का नाश कर दीजिए।★ ••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• जय हनुमान ज्ञान गुण सागर, जय कपीस तिहुँ लोक उजाग...

वीर भामाशाह

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दानवीर भामाशाह जयंती की आप सभी को बधाई.. भक्त कर्मा माता की जय साहू समाज जिंदाबाद भामाशाह (1542 - लगभग 1598) बाल्यकाल से मेवाड़ के राजा महाराणा प्रताप के मित्र, सहयोगी और विश्वासपात्र सलाहकार थे। अपरिग्रह को जीवन का मूलमंत्र मानकर संग्रहण की प्रवृत्ति से दूर रहने की चेतना जगाने में आप सदैव अग्रणी रहे। मातृ-भूमि के प्रति अगाध प्रेम था और दानवीरता के लिए भामाशाह नाम इतिहास में अमर है। दानवीर भामाशाह का जन्म राजस्थान के मेवाड़ राज्य में 29 अप्रैल 1547 को हिंदू धर्म की तेली जाती में हुआ। भामाशाह का निष्ठापूर्ण सहयोग महाराणा प्रताप के जीवन में महत्वपूर्ण और निर्णायक साबित हुआ। मातृ-भूमि की रक्षा के लिए महाराणा प्रताप का सर्वस्व होम हो जाने के बाद भी उनके लक्ष्य को सर्वोपरि मानते हुए अपनी सम्पूर्ण धन-संपदा अर्पित कर दी। यह सहयोग तब दिया जब महाराणा प्रताप अपना अस्तित्व बनाए रखने के प्रयास में निराश होकर परिवार सहित पहाड़ियों में छिपते भटक रहे थे। मेवाड़ के अस्मिता की रक्षा के लिए दिल्ली गद्दी का प्रलोभन भी ठुकरा दिया। महाराणा प्रताप को दी गई उनकी हरसम्भव सहायता ने मेवाड़ के आत्म सम्मान ए...